Monday, 24 October 2016

चक्कर आने का होम्योपैथिक इलाज














कारण- शरीर में पानी की कमी, खाली पेट (भूखा) रहना, पौष्टिक पदार्थों का अभाव, रक्तचाप की बीमारी, हृदय-रोग, पेट के पुराने रोग, अधिक भोग, अधिक श्रम आदि कारणों से चक्कर आते हैं |


लक्षण - रोगी को अपने चारों ओर के पदार्थ घूमते हुये प्रतीत होते हैं।


उपचार


• कॉकुलस इन्डिका 30-2 बूंद, काली ब्रोमाइड Q-3 बूंद, मैन्थापिप Q-3 बूंद, इनैन्थि क्रोकेटा Q-5 बूंद, एक्वा - आधा औंस - इन सभी को मिला लें । यह एक मात्रा है । इस प्रकार प्रतिदिन तीन मात्रायें देने से लाभ होता है ।


• काली ब्रोमाइड Q-5 बूंद, मैन्थापिप Q-3 बूंद, मैग्नीशिया कार्ब 1x - 5 ग्रेन, कैलोमल 1x - 2 ग्रेन, एक्वा-आधा औंस - इन सभी को मिला लें । यह एक मात्रा है। इस प्रकार प्रतिदिन तीन मात्रायें देने से लाभ होता है।




पथ्य - रोगी को पूरी नींद लेनी चाहिये । पौष्टिक पदार्थ खाने चाहिये। पानी पर्याप्त मात्रा में पीना चाहिये। कभी भी खाली पेट नहीं रहना चाहिये। भोग-विलास से दूर रहना चाहिये | मानसिक रूप से शांत रहना चाहिये ।

आधासीसी का दर्द का होम्योपैथिक इलाज

आधासीसीका दर्द










कारण - अत्यधिक मानसिक श्रम, शरीर से रस-रक्त अधिक निकल जाना, पौष्टिक भोजन का आभाव, सफाई का अभाव, शोर-शराबे में रहना आदि कारणों से यह रोग हो जाता है ।

लक्षण - इस रोग में आधे सिर में-चाहे वह दाँयी ओर हो या बाँयी ओर दर्द होता है । बेचैनी, वमन, रोशनी-आवाज से चिढ़, मानसिक परेशानी आदि लक्षण प्रकट होते हैं ।

उपचार

• स्पाईजीलिया 200-1 बूंद, नैट्रम म्यूर 200-1 बूंद, सैंगुनेरिया 200-1 बूंद- इन सभी को 15 ग्रेन शुगर ऑफ मिल्क में मिला दें । यह तीन मात्रायें हैं । प्रत्येक आधा-आधा घण्टे के अन्तर से तीनों मात्रायें दे दें। ध्यान रखने की बात यह है कि यह मात्रायें दर्द तीव्र होने की स्थिति में न दें बल्कि जब दर्द कम या बन्द हो जाये, तब दें । आवश्यकता महसूस होने पर तीन दिन बाद पुनः दे सकते हैं। इस प्रकार देने से आधासीसी का दर्द में लाभ होता है।

• काली ब्रोमाइड Q-3 बूंद, कैफीनम हाइट्रेट Q-5 बूंद, एन्टीफैबरीन Q-5 बूंद, क्लोरोफार्म-4 बूंद, फैनस्टीन Q-5 बूंद, एक्वा-1 औंस - इन सभी को मिला लें । यह एक मात्रा है । रोग का दौरा प्रारम्भ होते ही ऐसी केवल एक मात्रा दें ।

पथ्य- रोगी की सर्दी-गर्मी, शोर-शराबे, धूल-धुंये भरे वातावरण से बचाना चाहिये । रोगी को पौष्टिक पदार्थ देने चाहिये और आराम कराना चाहिये।